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हैं सारी दुनिया का चमन हिन्दुस्तान की मिट्टी,
लिखे क्या कोई तुझपे सुखन हिन्दुस्तान की मिट्टी।

राम, मोहम्मद, नानक, ईसा यहाँ,
हैं ख़ुदा की मेज़बान हिन्दुस्तान की मिट्टी।

कोई लेता हैं गंगा में डुबकी तो कोई करता है इसमें वज़ू,
ऐसे संगम से रौशन हैं हिंदुस्तान की मिट्टी।

अशफ़ाक, बिसमिल, भगत, आज़ाद करते हैं सजदा यहाँ,
हैं शहीदों का गुलिस्तां हिंदुस्तान की मिट्टी।

माज़ी की कब्र में दफ़्न हो गये इसमे बुरी नज़र डालने वाले,
हैं वक़्त की आन, बान, शान और पहचान हिन्दुस्तान की मिट्टी।

रहीम, कबीर, तुलसी, व्यास ने गूँथी है तहज़ीब की माला,
हैं ग़ालिब का दीवान हिंदुस्तान की मिट्टी।

न था, न हैं, न होगा कोई इसके जैसा,
हर रंग, मज़हब, ज़बान का करती है सम्मान हिंदुस्तान की मिट्टी।

दुआ है दफ़्न हो जाये इसमें कहीं,
और बन जाये हम हिंदुस्तान की मिट्टी।

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Tripathi@gmail.com'

Utkarsh tripathi

Law student. Poetry enthusiast. Nationalist. Humanist. Spiritual. Pen name- Saaz(tune)
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